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Rajnath Singh
NAME:

Rajnath Singh

DATE OF BIRTH:12 February 1950
TIME OF BIRTH:01:36 AM
PLACE OF BIRTH:Varanasi, India
Rajnath Singh kundali


राजनाथ सिंह का जन्म भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिले के एक छोटे से ग्राम भाभोरा में हुआ था। उनके पिता का नाम राम बदन सिंह और माता का नाम गुजराती देवी था। वे क्षेत्र के एक साधारण कृषक परिवार में जन्में थे और आगे चलकर उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से प्रथम क्ष्रेणी में भौतिक शास्त्र में आचार्य की उपाधी प्राप्त की। वे 13 वर्ष की आयु से संघ परिवार से जुड़े हुए हैं और मिर्ज़ापुर में भौतिकी व्याख्यता की नौकरी लगने के बाद भी संघ से जुड़े रहे। राज नाथ सिंह का जन्म 10 जुलाई 1951 में शुक्र की महादशा में वाराणसी उत्तर प्रदेश में हुआ था । ये महादशा इनके जीवन में 2 साल तक रही । 

30 सितंबर  1953 में इनकी जन्म कुंडली के आधार पर सूर्य की महादशा लगी जो की 29 सितंबर 1959 तक रही सूर्य इनकी जन्म कुंडली में तीसरे भाव में बैठे है जहां से इंसान को मेहनत के अनुसार फल मिलता है । इनकी इनकी पढ़ाई-लिखाई अच्छे स्तर पर होने के योग बने चंद्रमा पंचम भाव में बैठकर इनको पढ़ाई लिखाई का पूरा फल दिया  और इनको अपनी मेहनत के बलबूते पर सब कुछ हासिल करने के योग बने 30 सितंबर 1959 से इनकी जन्म कुंडली में चन्द्र की महादशा लगी इस महादशा के अंतर्गत इनके कैरियर में आगे बढ़ने के योग बने 10 साल की चन्द्र की महादशा में इनके अपने पढ़ाई के साथ साथ दूसरों को ज्ञान देने के भी योग बनते है । इसके बाद मंगल की महादशा जो की 30 सितंबर 1969 से इनकी जन्म कुंडली में लगी इस महादशा के अंतर्गत इनको अपने कैरियर में ऊँचाइयाँ मिली । इनके नौकरी के बहुत अच्छे योग बने वैसे तो इनकी जन्म कुंडली में राजनीति में समझ रखने के योग बनते है लेकिन औपचारिक तौर पर इनके 1974 में मंगल की महादशा में ही राजनीति में रुझान हुआ ।

राहू की महादशा इनके जन्म कुंडली में 30 सितंबर 1976 में लगी इस 18 साल की महादशा में राजनाथ सिंह की एक के बाद एक तरक्की के योग बने । राहू इनकी जन्म कुंडली के ग्यारहवें  भाव में लाभ के स्थान में बैठे है, जहां से अच्छे विचारो के साथ आगे बढ़ने के योग बने और 1997 में राहू की महादशा के अंतर्गत ही इनको एक बडी जीत हासिल हुई और ये उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री के रूप में उभर कर आए ।

जब इनकी जन्म कुंडली में गुरु की महादशा 30 सितंबर 2010 में लगी तब जन्म कुंडली के बारहवें भाव में बैठे  गुरु ने इनको राजनीति क्षेत्र में मान-सम्मान दिया और 2002 से लेकर 2009 तक कई राज्यो पर राज करने के योग बने ।

इसके बाद शनि की महादशा 30 सितंबर 2010 में लगी जो की 2029 तक रहेगी इस दशा के अंतर्गत इन्होने अपने काम में तरक्की तो पायी ही इसके अलावा कई धरम-करम के काम करने का रुझान भी हुआ और चल रही महादशा के अंतर्गत आगे आने वाले समय मे जितने धरम करम का कार्य करते रहेंगे उतने इनको आगे के जीवन में सम्मान हासिल होता रहेगा । शनि छटें भाव में बेठे है जहा से रोग का स्थान भी देखा जाता है जिसके कारण इनके मानसिक तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है यदि ये शनि के थोड़े दान करके चलते है तो तनाव से मुक्त रहेंगे ।



 
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