बस अब दु:ख और नहीं
Call Us: +91-124-6674671


Recent added

A P J Abdul Kalam

अब्दुल कलाम एक ऐसा नाम जो की हमारे इतिहास में सदा अमर रहेगा। इनका पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलअब्दीन अब्दुल कलाम सोर्ट में ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल था। 15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोडी गाँव (रामेश्वरम, तमिलनाडु) में एक मध्यमवर्ग मुस्लिम परिवार में इनका जन्म हुआ। इनके पिता जैनुलाब्दीन न तो ज़्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसे वाले थे। इनके पिता मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे, और इसी से इनके परिवार का पालन पोषण होता था।

अब्दुल कलाम संयुक्त परिवार में रहते थे। परिवार की सदस्य संख्या का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि यह स्वयं पाँच भाई एवं पाँच बहन थे और घर में तीन परिवार रहा करते थे। अब्दुल कलाम के जीवन पर इनके पिता का बहुत प्रभाव रहा।

अब्दुल कलाम जी की जन्म कुंडली मे सूर्य ग्रहण होने के कारण शुरुआती जीवन उनका काफी कठिन परिस्थितियों मे व्यतीत हुआ।

1936 से 1953 तक कलाम जी की जन्म कुंडली मे बुध की महादशा का समय चला क्योंकि उनकी जन्म कुंडली मे बुध केतू का योग होने के कारण बचपन का समय काफी मानसिक परेशानी का रहा। अपनी ऊच राशि मे विराजमान गुरु के होने के कारण ज्ञान और रेसर्च के काफी अछे योग बने। अबदुल जी जन्म कुंडली मे सूर्य बुध अदित्या योग के कारण अपने बुद्धि के चलते काफी प्रसिद्धि प्राप्त हुई।

2003 से राहु का समय आरंभ हुआ जिसके चलते उन्होंने देश के कुछ सबसे महत्वपूर्ण संगठनों (डीआरडीओ और इसरो) में कार्य किया। उन्होंने पोखरण द्वितीय परमाणु परीक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ कलाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और मिसाइल विकास कार्यक्रम के साथ भी जुड़े थे। इसी कारण उन्हें ‘मिसाइल मैन’ भी कहा जाता है। 

वर्ष 2002 में कलाम भारत के राष्ट्रपति चुने गए और 5 वर्ष की अवधि की सेवा के बाद, वह शिक्षण, लेखन, और सार्वजनिक सेवा में लौट आए। उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इसी राहु की महादशा में जैसे ही केतु का समय आया। दोनों ही गृह उनकी जन्म कुंडली मे नीच के होने क कारण मृत्यु तुल्य कष्ट के योग बने और हार्ट अटैक के कारण मृत्यु प्राप्त हो गई।

 

Know More
Hema Malini

हेमा-मालिनी भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की एक बेहतरीन अदाकारा हैं। वर्तमान में हेमा मालिनी मथुरा (उत्तर प्रदेश) से भारतीय जनता पार्टी की लोकसभा सांसद हैं। प्रसिद्ध अभिनेत्री और नृत्यांगना हेमा मालिनी बालीवुड की उन गिनी, चुनी अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिनमें सौंदर्य और अभिनय का अनूठा संगम देखने को मिलता है। लगभग चार दशक के कैरियर में उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया। हेमा मालिनी को फिल्मों में उल्लेखनीय योगदान के लिए 1999 में फिल्मफेयर के लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान से भी सम्मानित किया गया। 

हेमा मालिनी  का जन्म 16 अक्टूबर 1948 में अम्मनकुडी तमिलनाडु में मंगल की महादशा में हुआ । मंगल इनकी जन्म कुंडली में पंचम भाव में स्थित है। मंगल यहा बैठ कर इंसान को बहुत मेहनती बनाता है। मंगल की महादशा इनकी जन्म कुंडली में 5 साल तक रही। 

राहु की महादशा 14 मई 1953  में लगी, राहु दसवें भाव में स्थित है ऐसे में इनकी पढ़ाई लिखाई के ज्यादा अच्छे योग नहीं रहे और इनका शुरुआत से ही कला के क्षेत्र में झुकाव रहा। इस दौरान काफी संघर्ष करने के बाद इनको कला के क्षेत्र में सफलताएं मिली। राहु की महादशा में कई बार ये कई विवादो से जुड़ी, लेकिन 1962 इनके लिए अपने कला के क्षेत्र में तरक्की करने के योग बने।

16 मई 1971 के अंतराल में गुरु की महादशा चली इस महादशा के अंतर्गत इनके जीवन में कई तरह के उतार चढ़ाव आए लेकिन गुरु छठें भाव में बैठकर  इनको अच्छे योग देता है, लेकिन यह योग इनको सेहत से संबन्धित परेशनीयां भी देता है। गुरु की महादशा इनके जीवन में 16 साल तक रही और इनको कला के क्षेत्र में आगे बढ़ाया और गुरु की महादशा में ही इनका विवाह कला क्षेत्र के प्रसिद्ध अभिनेता धर्मेंद्र से 21 अगस्त 1979 में  हुआ। शुक्र दूसरे भाव में बैठकर जीवन साथी का पूरा सुख देता है और तरक्की में सहायक बनता है। इसी दशा के अंतर्गत 2 नवम्बर 1981 में इनको कन्या संतान की प्राप्ति हुई।

16 मई 1984 में केतु की महादशा का आगमन इनके जीवन में हुआ। केतु इनकी जन्म कुंडली में चतुर्थ भाव में बैठकर चन्द्र को ग्रहण लगा देता है ।इससे जातक का मन बहुत अशांत रहता है और कही न कही स्वास्थ्य से संबन्धित परेशनीया भी देता है। अतः केतु की महादशा में इनकी दूसरी बेटी का जन्म 28 जुलाई 1985 में हुआ। बुध इनकी जन्म कुंडली में चौथे भाव में बैठकर बेटियों का सुख देता है और ऐसे जातक की बेटियाँ राज करती है।

16 मई 1991 में शुक्र की महादशा लगी शुक्र इनकी जन्म कुंडली में दूसरे भाव अर्थात धन भाव में स्थित है।  यह महादशा 20 साल के लिए इनके जीवन में रही। दूसरे भाव के शुक्र ने इनका रुझान राजनीति की तरफ किया । दूसरे भाव का शुक्र भड़काऊ भाषण देने पर इंसान को अच्छा फल होता है। इस महादशा के दौरान 2003 में इनके राजनीति में आगे कदम बढ़ने के योग बने और सफलता भी मिली।

16 मई 2011 में  सूर्य की महादशा लगी सूर्य इनकी जन्म कुंडली में तृतीय भाव में यानि मेहनत के स्थान में स्थित है। यहा से यदि जातक पसीने निकलने वाली मेहनत करे तो राजा जैसा जीवन देता है इस दशा के अंतर्गत इनके मान-सम्मान को और बढ़ाया जिससे की ये अपने कार्य क्षेत्र में आगे बढ़े। यह महादशा इनकी जन्म कुंडली के आधार पर 2017 तक इनके जीवन में रही।

16 जून 2017 में चन्द्र की महादशा लगी जो की इनकी जन्म कुंडली के नवमें भाव में बैठे है, जहां से भाग्य का स्थान देखा जाता है। इस महादशा के अंतर्गत इनको रुपये पैसे मन की शांति और काम के क्षेत्र में भाग्य का बहुत बड़ा सहयोग मिलता है।  इस महादशा में इनको अपने कार्य के क्षेत्र में प्रसिद्धि और आगे बढ़ने में सहायता मिलती है । अतः चल रही महादशा 2027 तक रहेगी।

Know More
Dev Anand

देव आनन्द जी का पूरा नाम धर्मदेव आनंद, था और वह देव आनन्द के नाम से प्रसिद्ध थे, अपने जमाने के सदाबहार अभिनेता, निर्माता और निर्देशक देव आनन्द अपने समय में हमेशा चर्चा में रहे है। उनके पिता किशोरीमल आनंद पेशे से वकील थे। उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज लाहौर से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। देव आनंद के भाई, चेतन आनंद और विजय आनंद भी भारतीय सिनेमा में सफल निर्देशक थे। उनकी बहन शील कांता कपूर प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक शेखर कपूर की माँ है। देव आनन्द जी की फिल्म का एक गीत 'मैं जिन्दगी का साथ निभाता चला गया' उनके जीवन के इस पहलू को दर्शाता है। देव आंनद का फिल्मी सफर 1946 में अपने मित्र गुरुदत्त के साथ 'हम एक है' फिल्म से शुरू हुआ। उन्होंने अब तक सौ से अधिक फिल्मों में अभिनय, तीस फिल्मों का निर्देशन, बीस फिल्मों का निर्माण और दस फिल्मों की कहानी लिखी है।

देव आनन्द का जन्म 26 सितम्बर 1923 में बुध की महादशा में गुरदासपुर में हुआ। यह महादशा इनके जीवन मे 1934 तक रही, इनकी जन्म कुंडली में शिक्षा के ज्यादा अच्छे योग नहीं है। बुध बारहवें भाव में व्यक्ति के बनते हुए काम को बिगाड़ता है। लेकिन इनकी जन्म कुंडली में सूर्य बारहवें स्थान में शनि के साथ बैठकर इनके पिता पक्ष को खराब करने के योग बनाता है। जिसके कारण इनकी शिक्षा बीच में ही रुक गई।  

17 जून 1934 में केतु की महादशा में इनकी पढ़ाई रुकने के योग बने केतु इनकी जन्म कुंडली में पंचम भाव में बैठकर जातक की सोच को और उसके काम को खराब करने का काम करता है। इसके अंतराल में शुक की महादशा जैसे ही 17 जून 1941 में लगी और वहां से इनके काम का जरिया बनना शुरू हो गया। शुक्र इनकी जन्म कुंडली में बारहवें भाव में बैठकर उच्च का फल दे रहा है। इस दशा के अंतर्गत देवानंद जी ने सेना की तरफ अपना रुझान किया लेकिन इनके घर की आर्थिक स्थिति ज्यादा ठीक न होने पर इन्होने एक साल तक वह काम करने के बाद छोड दिया और फिर इनका रुझान कला क्षेत्र की तरफ हुआ और इनके कैरियर की शुरुआत 1946 में हुई इसके बाद इनके जीवन में एक के बाद एक तरक्की के योग बने । 

अतः इसी महादशा के अंतर्गत इनके विवाह के योग 1954 में बने और इनका विवाह कल्पना कार्तिक से हुआ। 30 जून 1956 में इनके पुत्र संतान होने के योग और एक कन्या संतान के भी योग बने। यह दशा इनके जीवन में 20 साल तक रही ।

सूर्य की महादशा जन्म कुंडली के अनुसार 17 जून 1961 में लगी। इस महादशा के अंतर्गत इनके जीवन में काम के क्षेत्र में कई प्रकार की खरबियों के हालात देखे गए और मानसिक तनाव, सेहत की खराबी, के भी योग बने।  सूर्य इनकी जन्म कुंडली में बारहवें भाव में शनि के साथ बैठ कर अपना फल खराब कर देता है और जीवन साथी की सेहत और खुद काम के हालत में कमी करता है। इसके बाद इनकी जन्म कुंडली के आधार पर चन्द्र की महादशा लगी चन्द्र इनकी जन्म कुंडली में छठें भाव  में स्थित है जो की इनको काम के लिए बहुत अच्छा और कमाई के जरिये बनाता है और आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाता है, साथ ही साथ मंगल और राहू की स्थिति समान रही । फिल्मी जगत में इन्होने अपना नाम कमाया और अपना नाम कामया साथ ही गुरु की महादशा में 3 दिसम्बर 2011 को 88 वर्ष की उम्र में इनका निधन हो गया ।

 

Know More
Milkha Singh

मिल्खा सिंह का नाम भारत के सबसे प्रसिद्ध, सम्मानित और सफलतम धावक हैं। कामनवेल्थ खेलो में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले वे पहले भारतीय है। खेलो में उनके अतुल्य योगदान के लिये भारत सरकार ने उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च सम्मान पद्म श्री से भी सम्मानित किया है। मिल्खा सिंह जी ने रोम के 1960 ग्रीष्म ओलंपिक और टोक्यो के 1964 ग्रीष्म ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया था। उनको “उड़न सिख” का उपनाम दिया गया था। इन्होनें अपने जीवन की घटनाओं से संबंधित एक पुस्तक की भी रचना की जिसका नाम था भाग मिल्खा भाग और बाद में इस पुस्तक का भारतीय हिन्दी सिनेमा ने एक फिल्म का रुप दिया और उसका नाम रखा भाग मिल्खा भाग । इस फिल्म का इसका निर्देशन राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने किया है।

मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवम्बर 1929 को राहु की महादशा में गोविन्दपुरा पाकिस्तान में हुआ । राहु इनकी जन्म कुंडली में चौथे भाव में स्थित है, जहा से घर की सुख शांति का स्थान देखा जाता है। यह महाद��ा इनकी जन्म कुंडली के अनुसार इनके जीवन में 1 साल तक रही ।

25 जुलाई 1930 में इनकी जन्म कुंडली में गुरु की महादशा लगी। गुरु इनकी जन्म कुंडली में पंचम भाव में स्थित है, जहां से इंसान को अपने पिता दादा का सुख मिलता है, लेकिन गुरु बुध की दृष्टि के अनुसार गुरु ने अपना फल खराब कर दिया और और पिता दादा और परिवार के सुखो में कमी के योग बने। इनकी पढ़ाई लिखाई के ज्यादा अच्छे योग नहीं रहे, इस दशा के अंतराल में इनके जीवन में अचानक भयानक हादसा होने के भी योग बने यानि गुरु की महादशा में इनका जन्म स्थान बदलने के योग बने, लेकिन मंगल लाभ के स्थान में बैठ कर इनको खेल के क्षेत्र में इनका रुझान बनाया।

25 जुलाई 1946 में शनि की महादशा लगी, शनि इनकी जन्म कुंडली के बारहवें भाव में स्थित है, जो जातक को थोड़ा संघर्ष देता है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ ये काफी ऊंचाइयाँ भी देता है। जैसा की इनकी जन्म कुंडली में सूर्य मंगल बुध ग्यारहवें भाव में और गुरु पंचम भाव में स्थित है। जहा से इनको सरकार से जुडने का योग बनाता है और सरकारी नौकरी लगी। मिल्खा सिंह की वैसे शुरुआत से ही खेल के क्षेत्र में रुचि रही क्योंकि इनकी जन्म कुंडली में मगल ग्यारहवें भाव में है। ऐसे जातक को खेल कूद के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने में सफलताएं हासिल होती है। इन्होने खेल के क्षेत्र में अपने कैरियर की शुरुआत 1958 की ।

25 जुलाई 1959 में बुध की महादशा काफी संघर्ष के बाद इनको अपने खेल के क्षेत्र में आगे बढ़े और इसी महादशा के अंतर्गत मिल्खा सिंह की शादी की निर्मल सैनी से 1962 में हुई। इसी महादशा के दौरान इनके तीन बेटी और एक बेटा होने के योग बने । इन्होने अपने जीवन में बहुत बुलंदियां हासिल की। बुध इनकी जन्म कुंडली में लाभ के स्थान में यानि की ग्यारहवें भाव में बैठ है, जो की 34 वर्ष के बाद अपना अच्छा फल प्रदान करता है।

25 जुलाई 1982 में केतु की महादशा में इनको काफी प्रसिद्धिया हासिल हुई। केतू इनकी जन्म कुंडली में दसवें भाव में यानि की काम-काज के स्थान में बैठ कर अपने काम क्षेत्र में अच्छा सुख मिला और अपने काम की वजह से कई बार स्थानांतरण भी हुए।

25 जुलाई 1989 में शुक्र की महादशा में थोड़ा सी इनकी सेहत से संबन्धित दिक्कते तो रही लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ-साथ इनको शुक्र की महादशा में लग्जरी लाइफ का मालिक बनाया। इनको अपने काम, जीवनसाथी और संतान का भरपूर सुख मिला। शुक्र की महादशा इनके जीवन में 20 साल तक रही, इस महदशा के अंतर्गत सन 1999 में समाज से जुडने के योग बने। उन्होंने सात साल के एक बेटे को गोद लिया। 

25 जुलाई 2009 में सूर्य की महादशा लगी सूर्य इनकी जन्म कुंडली में ग्यारहवें भाव में बैठे है, जहां जातक अगर झूठ और किसी के साथ धोके बाजी न करे तो ऐसा इंसान नेक दिल इंसान होता है और सूर्य लाभ के स्थान में बैठ कर इनको धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति करता है। इसी महादशा में इन्होने अपने व्यक्तित्व को अब किताब में उतार दिया। किताब के ऊपर इनके पूरे जीवन को एक फिल्म के रूप में 2013 में प्रदर्शित किया गया।

25 जुलाई 2015 में चन्द्र की महादशा के अंतराल इनको सेहत से संबन्धित परेशनियां होने के योग बनते है। चन्द्र छठे भाव में बैठ कर इनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत रखता है, लेकिन सेहत और मन से संबन्धित परेशानी देता है। यह महादशा 2025 तक रहेगी इस दशा के दौरान इनको सेहत से संबन्धित परेशानियां रहेगी।

 

Know More
Mahesh Bhatt

महेश भट्ट भारतीय फिल्म निर्देशक, निर्माता और स्क्रीन राइटर हैं। उनके शुरूआती निर्देशन करियर के दौरान उन्होंने कई बहुप्रशंसित फिल्में दी हैं जैसे अर्थ, सारांश, जानम, नाम, सड़क, जख्म। वे अब ज्यादातर फिल्मों में निर्माता और लेखक की भूमिका निभाते हैं और बॉक्स ऑफिस पर कमाई करने वाली फिल्मों में काम करते हैं जैसे जिस्म, मर्डर, वो लम्हे‍। उनके प्रोडक्शन विशेष फिल्म की यह खासियत है कि उनके बैनर तले बनी फिल्मोंं के गाने सुपरहिट होते हैं और उनका संगीत अन्य से काफी अलग और कर्णप्रिय होता हैं। भट्ट हमेशा नए टैलेंट को बढ़ावा देते हैं।

हिन्दी फिल्म जगत के निर्माता महेश भट्ट का जन्म केतु की महादशा मे 20 मई 1949 मे मुंबई महाराष्ट्र मे हुआ। केतु की महदशा इनके जीवन मे 7 साल तक रही। केतु इनकी जन्म कुंडली मे ग्यारहवें भाव मे यानि की लाभ के स्थान मे बैठे है। अगर हम इनकी शुरुआती पढ़ाई की बात करे तो चन्द्र और शनि की युति ��ुंडली दसवें भाव में है, जहा से ऐसे जातक अपनी पढ़ाई से संबन्धित परेशानियों का शिकार होते है।

मन को संतुष्ट नहीं रहने देती शुक्र की महादशा इनकी जन्म कुंडली मे 19 मई 1955 से इनके जीवन मे लगी । शुक्र इनकी जन्म कुंडली मे बारहवें भाव मे बैठे है, जहा से जातक को अपनी इच्छाएं पूरी करने मे सक्षम बनाता है। शुक्र की महादशा के दौरान इनकी पढ़ाई के साथ-साथ काम-काज करने के योग बने और हिन्दी फिल्म जगत मे निर्देशक के रूप मे उभर कर आए शुक्र से इनकी मेहनत का अच्छा लाभ मिला। इन्होने शुक्र ग्रह से संबन्धित ही क्षेत्र मे अपना काम चुना। इस महादशा मे ही इनकी शादी के योग बने और इनका विवाह किरण से 1970 मे हुआ इनकी दो संताने जिनका नाम पूजा भट्ट और राहुल भट्ट है।

19 मई 1975 मे सूर्य की महादशा मे इनको अपने काम मे बहुत सराहना और मान सम्मान मिला। सूर्य इनकी जन्म कुंडली मे ग्यारहवें भाव मे है, जहा से इंसान के काम और मान-सम्मान मे तरक्की के योग बनाता है। ऐसा इंसान अगर मांस मदिरा का सेवन न करे तो एक अच्छे रुतबे का मालिक बनाता है नहीं तो मान सम्मान मे हानि करता है ।

19 मई 1981 मे चन्द्र की महादशा के अंतर्गत इनको काम के क्षेत्र मे परेशानियों का सामना करने के योग बनते है क्योंकि चन्द्र इनकी जन्म कुंडली मे दसवें भाव मे शनि के साथ स्थित है। ऐसा जातक अपने संस्कार के विरुद्ध काम करेगा और आर्थिक लाभ मे भी कमी करता है । अतः इसी दशा के अंतर्गत इनकी दूसरी शादी 20 अप्रैल 1986 मे सोनी राज़दान से हुई जिनके 2 बच्चे है अलिया भट्ट और शाहीन भट्ट ।

19 मई 1991 मंगल की महादशा मे इनको काम सुख बहुत मिला लेकिन स्वास्थ्य से संबन्धित परेशानियां भी बढी। मंगल इनके भाग्य के स्थान मे बैठे है और ऐसे इंसान को मेहनत के हिसाब से भाग्य भी साथ देता है, लेकिन राहू की महादशा मे इनके स्वास्थ्य और काम पर अच्छा प्रभाव नहीं डालता क्योकि राहू पांचवें भाव मे स्थित है जो की जातक को दो शादियों के योग देता है, लेकिन काम के क्षेत्र मे ज्यादा अच्छा प्रभाव नहीं देता । राहू इनकी जन्म कुंडली मे मई 1998 से मई 2016 तक रहा । पंचम भाव मे राहु सूर्य ग्रहण बनाता है जो की व्यक्ति को समय समय पर मन और मान सम्मान और स्वभाव मे गुस्सा बढ़ाने के योग बनाता है।

गुरु की महादशा मे इनको सुख समृद्धि औलाद का सुख पूर्ण रूप से मिलेगा क्योंकि गुरु इनकी जन्म कुंडली मे दूसरे भाव मे है, जहा से धन का भाव देखा गया है जिससे इनको अच्छा लाभ मिलेगा गुरु इनकी जन्म कुंडली मे 19 मई 2016 से लगी और मई 2032 तक रहेगी ।

 

Know More
Sara Ali Khan

सारा अली खान का जन्म 12 अगस्त 1995 को मुंबई में हुआ।

Know More

 
Free Future Prediction
 
Free Prediction Yes I Can Change


Contact Info
Follow Us
           
     

We accept all these major cards

Copyright © 2005 - 2017. G D Vashist & Associates Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
हिंदी में पढ़े