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Mulayam Singh Yadav

मुलायम सिंह यादव जी का नाम राजनीति की दुनिया मे कौन नहीं जनता है। आज हम उनकी जन्म कुण्डली से संबन्धित विश्लेषण करने वाले है। मुलायम सिंह जी का जन्म 22 नवम्बर 1939 मे बुध की महादशा मे यूपी के इटावा जिले मे हुआ। मुलायम जी के पिता उनको पहलवान बनाना चाहते थे। लेकिन उनकी जन्म कुण्डली मे बन रहे बुध शुक्र के योग ने उनको राजनीति की तरफ आकर्षित किया जबकि उनके परिवार का कोई सियासी बैकग्राउंड नहीं था। 1956 मे मुलायम जी के जीवन मे केतु की महादशा का समय चला कामकाज के स्थान मे बैठा केतु उनको नेम फेम के साथ लाभ के भी काफी अच्छे योग प्रदान करता है। मुलायम सिंह जी की जन्म कुण्डली मे बन रहे गजकेसरी योग के कारण उनके भाग्य ने उनके जीवन के शुरुआती दौर मे काफी अच्छा साथ दिया। 

नवम भाव मे विराजमान गुरु ने उनको बुजुर्गों के साथ मिलने के कारण कार्य मे तरक्की प्राप्त हुई। 1967 का साल ऐतिहासिक रहा जब वो पहली बार �ुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। इस समय शुक्र की महादशा का टाइम उनकी जन्म कुण्डली मे चल गया था। इस दशा मे मुलायम संयुक्त समाजवादी दल के टिकट पर अपने गृह जनपद इटावा की जसवंत नगर सीट से आरपीआई के उम्मीदवार को हराकर विजयी हुए थे। मुलायम जी को पहली बार मंत्री बनने के लिए 1977 तक इंतजार करना पड़ा। उस वक्त कांग्रेस विरोधी लहर में उत्तर प्रदेश में भी जनता सरकार बनी थी।

मुलायम सिंह यादव जी 1980 के आखिर में उत्तर प्रदेश में लोक दल के अध्यक्ष बने थे। लेकिन सूर्य शुक्र के योग के कारण ग्रहस्थ जीवन के सुख मे कमी हुई जिसके चलते उनकी दो शादिया हुई। यूपी के मौजूदा सीएम अखि‍लेश यादव मुलायम की पहली पत्नी के बेटे हैं। मुलायम सिंह यादव की राष्ट्रवादी, लोकतन्त्र और धर्मनिरपेक्ष के सिद्धांतों मे अटूट आस्था रही। वर्तमान मे 2006 से 2024 तक मुलायम जी की जन्म कुण्डली मे राहू की महादशा का समय चल रहा है। चतुर्थ भाव मे विराजमान राहु सेहत से संबंधित परेशानियों का योग बनाता है। साथ ही नेम फेम भी खराब होने के योग बनाते है इसलिए सही समय पर किए हुए उपाय काफी लाभकारी सिद्ध होगे ।

शुभ रत्न – पुखराज 

 

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Vicky Kaushal

विक्की कौशल फिल्म जगत मे एक नया नाम उभर कर आया है, जिसने अपने अभिनय के माध्यम से यहा दिखा दिया है कि आने वाले समय मे वह चमकते सितारे नज़र आएंगे।  आज हम उनकी कुण्डली  के बारे मे विश्लेषण करने वाले है। विक्की कौशल जी का जन्म  16 मई 1988 को सूर्य की महादशा मे मुंबई शहर मे हुआ। विक्की जी की जन्म कुण्डली  मे पंचम भाव मे विराजमान सूर्य बुध की युति ने पिता के कार्य के प्रति रुचि प्रदान की।  

1993 से 2003 तक विक्की  कौशल जी की जन्म कुण्डली  मे चंद्रमा की महादशा का समय शुरू हुआ यह समय शिक्षा और ज्ञान के बहुत ही अच्छे सुख प्रदान किए। विक्की जी की जन्म कुण्डली  मे चन्द्र गुरु के गज केसरी योग चौथे भाव मे होने के कारण कम उम्र मे ही काफी अच्छी समृद्धि के सुख प्रदान किए।  2003 मे मगल की महादशा का समय उनके जीवन मे चला यहा समय कामकाज के क्षेत्र मे काफी उतार चड़ाव वाला रहा ।

अपने कॉलेज के दूसरे वर्ष के दौरान, वह एक औद्योगिक यात्रा के लिए एक कंपनी में गए, जहाँ उन्होंने महसूस किया कि वह 9 से 5 की नौकरी नहीं कर पाएंगे। फिर क्या, नौकरी के लिए चुने जाने के बावजूद भी उन्होंने अभिनय को ही चुना। उन्होंने शुरुआत में ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ (2010) में अनुराग कश्यप की सहायता की, जहाँ वे ‘मसान’ (2015) के निर्देशक नीरज घायवन से मिले, जिन्होंने उन्हें थिएटर करने की सलाह दी। इसके तुरंत बाद, वह रंगमंच से जुड़ गए और एक थिएटर कलाकार के रूप में काम किया और नसीरुद्दीन शाह के ‘मोटले’ और मानव कौल के अरन्या जैसे थिएटर समूहों के साथ काम किया।

मुंबई में प्रसिद्ध ‘किशोर नमित कपूर अभिनय संस्थान’ से अभिनय कौशल सीखा। विक्की  कौशल जी की जन्म कुण्डली  मे जैसे ही राहू मे राहू की महादशा का समय शुरू हुआ उनके जीवन काफी सकरात्मक छवि निकाल कर आयी और एक के बाद एक उन्होने काफी अच्छी फिल्म जगत मे पहचान बनाई।  धनस्थान मे बैठे राहु ने धन के मामले मे काफी अच्छे लाभ के योग प्रदान किए।  जनवरी 2018 मे जैसे ही राहु मे बुध का अंतर्समय आया तो यह समय उनके कला के क्षेत्र मे काफी सफल साबित हुआ।  अगस्त 2020 मे विक्की जी की जन्म कुण्डली  मे राहु की महादशा मे केतू का अंतर्समय शुरू होगा लेकिन अष्टम भाव मे विराजमान केतु के कारण यह आने वाले समय मे दुर्घटना और मानसिक तनाव के योग बनेगे। यदि समय रहते इन खराब योग के उपाय कर लिए जाए तो यह समय काफी शुभ फल देगा और साथ मे स्थान बदल कर उन्नति की ओर अग्रसर होगा।

शुभ रत्न – पुखराज 

 

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Manish Malhotra

मनीष मल्होत्रा का जन्म 5 दिसंबर 1966 को लंदन में हुआ था।

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Sushmita Sen

सुष्मिता सेन जी का नाम आज कौन नहीं जानता है, आज हम उनकी कुंडली के बारे मे विश्लेषण करने वाले है। सुष्मिता जी का जन्म 19 नवम्बर 1975 को सूर्य की महादशा मे हैदराबाद मे हुआ। सुष्मिता जी की जन्मकुण्डली मे उच्च भाव मे शुक्र होने के कारण कला के क्षेत्र मे उनको काफी अच्छी रुचि और साथ मे सफलता प्राप्त हुई। सुष्मिता सेन जी के पिता पूर्व भारतीय वायुसेना विंग कमांडर और गहनों के डिजाइनर है। सुष्मिता सेन की जन्मकुण्डली मे सूर्य धन स्थान मे होने के कारण पिता की तरफ से उनको काफी लाभ प्राप्त हुआ। सुष्मिता जी की जन्मकुण्डली मे 1978 से 1988 तक चंद्रमा का समय चला जिसमे उन्होंने नई दिल्ली में वायुसेना गोल्डन जयंती संस्थान और सिकंदराबाद में सेंट एन हाई स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की। 

सुष्मिता जी की जन्म कुंडली मे भाग्य स्थान मे मंगल होने के कारण जैसे ही मंगल की महादशा का समय चला जोकि उनको 1995 तक प्रभावित करता रहा। इस समय मे उन्होने अपने कामकाज की शुरुआत की जोकि काफी सफल भी साबित हुई। सुष्मिता सेन इसी समय में मिस यूनिवर्स बनने वाली पहली भारतीय महिला बनी जोकि उनकी विशेष मान समान का कारण रहा। सूर्य और मंगल के मिल रहे सपोर्ट से सुष्मिता जी ने फिर पीछे मूड कर नहीं देखा। 1995 मे राहू की महादशा का आगमन हुआ उनके कार्य को और अधिक ऊंचाइया प्राप्त हुई। मिस युनिवर्स का खिताब जीतने के बाद सुष्मिता ने हिंदी सिनेमा में बतौर एक्ट्रेस कदम रखा, उनकी पहली फिल्म वर्ष 1996 में दस्तक रिलीज हुई और उसके बाद उनको कई तरह के पुरस्कार से भी नवाजा गया।

वर्तमान मे सुष्मिता जी की जन्मकुण्डली में गुरु की महादशा का समय चल रहा है जोकि उनको 2029 तक प्रभावित करेगी। ग्रहण योग के कारण गुरु के काफी अच्छे लाभ की कमी उनके जीवन मे रही जिसकी वजह से उनको ग्रहस्थ जीवन का सुख प्राप्त नहीं हुआ, लेकिन लग्न भाव मे बुध के कारण गोद ही सही लेकिन बेटी का सुख उनको अवश्य प्राप्त हुआ। गुरु मे बुध की अंतर्दशा के चलते भविष्य मे उनको सेहत से संबंधित परेशानियां आ सकती है इसलिए सही समय पर यदि उपाय कर लिया जाए तो इन परेशानियों से बचा जा सकता है।

शुभ रत्न – पुखराज 

 

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Lal Krishna Advani

लालकृष्ण आडवाणी जी का नाम कौन नहीं जनता है, भारतीय जनता पार्टी की नीव रखने का कार्य उनके द्वारा ही किया गया जोकि देरी से ही सही लेकिन सत्ता मे काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए वर्तमान मे अपनी सरकार चलाने मे अग्रसर है। उनके पिता श्री के डी आडवाणी और माँ ज्ञानी आडवाणी थीं। विभाजन के बाद भारत आ गए आडवाणी ने 25 फ़रवरी 1965 को 'कमला आडवाणी' को अपनी अर्धांगिनी बनाया। आडवाणी के दो बच्चे हैं। लालकृष्ण आडवाणी की शुरुआती शिक्षा लाहौर में ही हुई पर बाद में भारत आकर उन्होंने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से लॉ में स्नातक किया। आज वे भारतीय राजनीति में एक बड़ा नाम हैं।

लाल कृष्ण आडवाणी जी का जन्म 8 नवम्बर 1927 मे पाकिस्तान के कराची शहर मे केतु की महादशा के अंतर्गत हुआ। लग्न भाव मे विराजमान केतु एक राजा जैसा नाम और काम देता है इसी केतु ने उनको नेम फेम के योग प्रदान किए। जून 2031 से लालकृष्ण आडवाणी जी की जन्म कुंडली मे शुक्र की महादशा का समय शुरू हुआ जोकि उनको 20 साल तक प्रभावित करता रहा। लाभ स्थान मे विराजमान शुक्र और साथ मे पंचम भाव मे बैठे गुरु ने उनको अच्छी शिक्षा के सुख प्रदान किए। इसी शुक्र की महादशा मे आडवाणी जी ने राजनीति की शुरुआत की।

 

सप्तम भाव मे राहु होने के कारण इनको राजनीति के शुरुआती दौर मे उनको काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। लालकृष्ण आडवाणी जी की जन्म कुंडली मे 1951 से 1957 तक सूर्य की महादशा का समय उनको काफी प्रभावित करता रहा। इसी सूर्य की महादशा मे उनको ग्रहस्थी का सुख प्रदान किया। आडवाणी जी के जीवन मे विवाह के बाद तरक्की के काफी अच्छे सुख प्राप्त हुए। क्योंकि लाभ स्थान मे बैठे शुक्र विवाह के ही बाद भाग्य उदय का सुख प्रदान करता है। यह समय राजनीति के क्षेत्र मे भी काफी अच्छा साबित हुआ। सूर्य मंगल के योग ने उनको सरकार की तरफ से काफी लाभ प्राप्त होने का सुख प्राप्त हुआ ।

लाल कृष्ण आडवाणी जी की जन्म कुंडली मे 1974 से 1992 से राहु का समय आया। यह समय उनके जीवन मे मान प्रतिष्ठा के लिए काफी बेहतर साबित हुआ। लेकिन उनकी जन्म कुंडली मे मंगलबद्द के योग के कारण समय-समय पर उनको परेशनियों व धोखे का सामना करना पड़ा। पंचम भाव मे गुरु ने उनको एक अच्छा दूरदर्शी और अच्छे ज्ञान का मालिक बनाया। वर्तमान मे लालकृष्ण जी की कुंडली मे शनि का समय उनको प्रभावित कर रहा है। नीच भाव मे बैठ कर शनि उनको सेहत से संबन्धित परेशनीया देगा। यदि इसके सही समय पर उपाय कर लिए जाए तो यह समय इन परेशानियों को काफी हद तक कम कर देगा ।

शुभ रत्न – पुखराज 

 

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A P J Abdul Kalam

अब्दुल कलाम एक ऐसा नाम जो की हमारे इतिहास में सदा अमर रहेगा। इनका पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलअब्दीन अब्दुल कलाम सोर्ट में ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल था। 15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोडी गाँव (रामेश्वरम, तमिलनाडु) में एक मध्यमवर्ग मुस्लिम परिवार में इनका जन्म हुआ। इनके पिता जैनुलाब्दीन न तो ज़्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसे वाले थे। इनके पिता मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे, और इसी से इनके परिवार का पालन पोषण होता था।

अब्दुल कलाम संयुक्त परिवार में रहते थे। परिवार की सदस्य संख्या का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि यह स्वयं पाँच भाई एवं पाँच बहन थे और घर में तीन परिवार रहा करते थे। अब्दुल कलाम के जीवन पर इनके पिता का बहुत प्रभाव रहा।

अब्दुल कलाम जी की जन्म कुंडली मे सूर्य ग्रहण होने के कारण शुरुआती जीवन उनका काफी कठिन परिस्थितियों मे व्यतीत हुआ।

1936 से 1953 तक कलाम जी की जन्म कुंडली मे बुध की महादशा का समय चला क्योंकि उनकी जन्म कुंडली मे बुध केतू का योग होने के कारण बचपन का समय काफी मानसिक परेशानी का रहा। अपनी ऊच राशि मे विराजमान गुरु के होने के कारण ज्ञान और रेसर्च के काफी अछे योग बने। अबदुल जी जन्म कुंडली मे सूर्य बुध अदित्या योग के कारण अपने बुद्धि के चलते काफी प्रसिद्धि प्राप्त हुई।

2003 से राहु का समय आरंभ हुआ जिसके चलते उन्होंने देश के कुछ सबसे महत्वपूर्ण संगठनों (डीआरडीओ और इसरो) में कार्य किया। उन्होंने पोखरण द्वितीय परमाणु परीक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ कलाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और मिसाइल विकास कार्यक्रम के साथ भी जुड़े थे। इसी कारण उन्हें ‘मिसाइल मैन’ भी कहा जाता है। 

वर्ष 2002 में कलाम भारत के राष्ट्रपति चुने गए और 5 वर्ष की अवधि की सेवा के बाद, वह शिक्षण, लेखन, और सार्वजनिक सेवा में लौट आए। उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इसी राहु की महादशा में जैसे ही केतु का समय आया। दोनों ही गृह उनकी जन्म कुंडली मे नीच के होने क कारण मृत्यु तुल्य कष्ट के योग बने और हार्ट अटैक के कारण मृत्यु प्राप्त हो गई।

 

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