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भाई-बहन के अटूट स्नेह का प्रतीक है, राखी का त्यौहार रक्षाबंधन

भाई-बहन के अटूट रिश्‍ते का पर्व रक्षाबंधन संपूर्ण भारत वर्ष के हिंदुओं, मुस्लिमों, सिख और इसाईयों का एक बड़ा त्‍यौहार है । रक्षा बंधन का पर्व हिन्दू पंचाग के हिसाब से श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जो वर्ष 2019 में 15 अगस्त, गुरुवार के दिन को बड़ धूम-धाम के साथ मनाया जाएगा | रक्षाबंधन का त्यौहार भाई-बहन का पर्व है, बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती है |

भाई अपनी बहन को वचन देता है कि वह ताउम्र उसकी रक्षा करेगा,  इस पर्व की सबसे खास बात यह है कि इसे सिर्फ हिन्दू ही नहीं, बल्कि अन्य धर्म के लोग जैसे कि सिख, जैन और ईसाई भी बड़े हर्षोल्लास के साथ इसे मनाते हैं | ज्योतिष गणना के अनुसार  शुभ मुहूर्त पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 14 अगस्त को 15:45 बजे से हो रहा है। इसका समापन 15 अगस्त को 17:58 पर हो रहा है, कहा जाता है कि भद्रा में बहनें भाइयों को राखी नहीं बांधती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रावण की बहन ने भद्रा में उसे रक्षा सूत्र बांधा था, जिससे रावण का सर्वनाश हो गया था। इस बार राखी बांधने का मुहूर्त काफी अच्छा है, बहनें सूर्यास्त से पूर्व तक भाइयों को राखी बांध सकती हैं। 

इस वर्ष राखी बांधने का शुभ मुहूर्त पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 14 अगस्त को 15:45 बजे से हो रहा है। इसका समापन 15 अ�स्त को 17:58 पर हो रहा है। ऐसे में बहनें भाइयों को 15 अगस्त के सूर्योदय से शाम के 5:58 तक राखी बांध सकेंगी। रक्षा बंधन में एक आवश्यक नियम होता हैं कि भद्रा काल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। रक्षाबंधन का त्योहार गुरुवार को होने से इसका महत्व और बढ़ गया है। इस दिन भद्रा नहीं है और न ही किसी प्रकार का कोई ग्रहण है। इस वजह से इस वर्ष का रक्षाबंधन शुभ संयोग लिए है और सौभाग्यशाली भी है।इस प्रकार भाई बहन के इस पवित्र महापर्व को प्रेम और श्रद्धा पूर्वक मनाने से भाई बहन का संबंध आजीवन बना रहता है।

हमारा भारत वर्ष त्यौहारों का देश है। यहाँ विभिन्न प्रकार के त्यौहार मनाए जाते हैं। हर त्यौहार अपना विशेष महत्त्व रखता है। रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक त्यौहार है। यह पर्व  बहन और भाई की परंपरा का प्रतीक है। यह दान के महत्त्व को प्रतिष्ठित करने वाला पावन त्यौहार है। रक्षाबंधन पारिवारिक समागम और मेल-मिलाप बढ़ाने वाला त्यौहार है। इस अवसर पर परिवार के सभी सदस्य इकट्‌ठे होते हैं। विवाहित बहनें मायके वालों से मिल-जुल आती हैं, और उनके मन में बचपन की यादें सजीव हो जाती हैं । बालक-बालिकाएँ नए वस्त्र पहन कर  घर-आँगन में खेल-कूद करते हैं। इस तरह पारिवारिक संबंधों में प्रगाढ़ता आती है। लोग पिछली कडुवाहटों को भूलकर आपसी प्रेम को महत्त्व देने लगते हैं। रक्षाबंधन पारिवारिक समागम और मेल-मिलाप बढ़ाने वाला त्यौहार है ।

राखी की यह रीति बहुत पुरानी हैं इस बात का प्रमाण हमारे हिन्दू पुराणों में भी उल्लेख हैं, कहते हैं जब भगवान श्री कृष्ण ने शिशुपाल का वध किया था तब उनके हाथ में चोट आ गई थी तो उस समय बहन द्रोपदी ने उनके खून को बंद करने के लिए अपनी साडी का चीर फाड़ कर उनके हाथ में बांध दिया था और यह दिन श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था, तब भगवान श्री कृष्ण ने द्रोपदी की लाज बचाकर अपनी बहन के राखी का कर्ज चुकाया था| हिन्दू धर्म के हर त्यौहार के पीछे कोई न कोई आशय जरूर छिपा रहता और हमे इन त्यौहारों से एक सीख जरूर मिलती हैं जिसे अपने इस जीवन में अवश्य उतारनी चाहिये| त्यौहार हमे सीखते हैं की हमे आपस के गीले-शिकवे भूल कर अपने परिवार और समाज में भाई-चारा कायम करना चाहिए और अपने इन भारतीय त्यौहारों को मनाने का लक्ष्य पूरा करना चाहिए|

 

राखी बांधते समय करें इस मंत्र का उच्चारण :-

येन बद्धो बलिराजा, दानवेन्द्रो महाबलः|

तेनत्वाम प्रति बद्धनामि रक्षे, माचल-माचलः||

 

रक्षा बंधन के इस पवित्र और पावन पर्व रक्षाबंधन की सभी बहनों और भाईयों को अनंत शुभकामनाएँ और ढ़ेर सारी बधाई | जी.डी. वशिष्ठ ज्योतिष संस्थान आप सभी के उज्जल भविष्य की मंगल कामना करता है |

 

Free Prediction Yes I Can Change Date Published : 08 Aug 2019
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