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सोमवार व्रत से कैसी मिलेगी भगवान शिव और माता पार्वती जी की कृपा ?

भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पात्र बनने के लिए सोमवार व्रत बहुत ही लाभकारी और पुण्यदायी है। सोमवार व्रत का विधान बहुत ही सरल और सहज है। प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, दिन भर मन प्रसन्न रखें, क्रोध, ईष्र्या, चुगली न करें। दिन भर शिव के पंचाक्षरी मंत्र नमः शिवाय का मन ही मन जप करते रहें। सायंका को प्रदोष बेला कहते हैं। इस समय यदि भगवान शिव के मंदिर जा सके तो समस्त दोष दूर हो जाते है और सायंकाल शिव मंदिर में या अपने घर में ही मिट्टी से शिवलिंग और पार्वती तथा श्री गणेश की मूर्ति बनाकर पूजन करें, इनमें दूवी, सफेद फूल, मालाओं से शिवपूजन समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाला होता है।

सावन के सबसे लोकप्रिय व्रतों में से 16 सोमवार का व्रत है। लड़कियां इस व्रत से मनचाहा वर पा सकती हैं। वैसे यह व्रत हर उम्र और हर वर्ग का व्यक्ति कर सकता हैं लेकिन नियम की पाबंदी के चलते वही लोग इसे करें जो इन्हें पुरा करने की क्षमता रखते हैं। विवाहित इसे करने से पहले ब्रह्मचर्य नियमों का पालन करना जरुरी हैं। 

 

सोमवार व्रत कथा - एक बार पार्वती जी के साथ भगवान शिव  सैर करते हुए धरती पर अमरावती नगरी में पधारें, वहां के राजा ने उनके रहने के लिए एक शानदार  मंदिर बनवाया । उसी मंदिर में एक दिन शिव शंकर और पार्वती जी ने चौसर का खेल शुरू किया तो उसी समय पुजारी पूजा करने को आए। माता पार्वती जी ने पुजारी से पुछा कि बताओं पुजारी जी जीत किसकी होगी। पुजारी ने अपने नाथ भोले शंकर के प्रति श्रृदा भाव रखते हुए नाम लिया, पर अंत में जीत पार्वती जी की हुई। इस पर पार्वती ने झूठी भविष्यवाणी के कारण पुजारी जी को कोढ़ी होने का दंड दे दिया और वह कोढ़ी हो गए। कुछ समय के बाद उसी मंदिर में स्वर्ग से अप्सराएं पूजा करने के लिए आईं तो पुजारी से कोढ़ी होने का कारण पूछा।  पुजारी  ने आप बीती  बताई। तब अप्सराओं ने उन्हें 16 सोमवार के व्रत के बारे में बताते हुए और देवों के देव महादेव से अपने कष्ट हरने की प्रार्थना करने को कहा। पुजारी ने भी अन्न व जल ग्रहण किए बिना सोमवार को व्रत रखें ।

अप्सराओं ने बताया कि  आधा सेर गेहूं के आटे का चूरमा तथा मिट्‌टी की तीन मूर्ति बनाए और चंदन, चावल, घी, गुड़, दीप, बेलपत्र आदि से शिव भोले बाबा की उपासना करें।उसके बाद में चूरमा भगवान शंकर जी को चढ़ाकर और फिर इस प्रसाद को 3 हिस्सों में बांटकर एक हिस्सा लोगों में बांटे, दूसरा गाए को खिलाएं और तीसरा हिस्सा स्वयं खाकर पानी पिएं।  इस विधि से सोलह सोमवार करें और सत्रहवें सोमवार को पांच सेर गेहूं के आटे की बाटी का चूरमा बनाकर भोग लगाकर बांट दें। फिर परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें। ऐसा करने से भोलेनाथ सबके मनोरथ पूर्ण करेंगे। 

 

सोमवार व्रत के नियम - प्रातः काल उठकर नित्य नियम से निव्रत्त होकर भगवान शिव का अभिषेक जल या गंगाजल से करें,  इसके आलावा अलग-अलग मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दूध, दही, घी, शहद, चने की दाल, सरसों तेल, काले तिल, आदि कई सामग्रियों से भी  शिव अभिषेक कर सकते है। इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र के द्वारा श्वेत फूल, सफेद चंदन, चावल, पंचामृत, सुपारी, फल और गंगाजल या स्वच्छ पानी से भगवान शिव और पार्वती का पूजन करना चाहिए। आरती करने के बाद भोग लगाएं और प्रसाद को परिवार में बांटने के बाद स्वयं ग्रहण करें।

 

Free Prediction Yes I Can Change Date Published : 03 Sep 2019
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