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जून माह में ही क्यों मनाया जाता है “पितृ दिवस” ?

हमारे जीवन मे हमारे लिए सबसे सर्वोच्च स्थान पिता को ही दिया जाता है l जैसा कि मां का स्थान दुनिया सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। वैसे भी पिता का स्थान भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। लेकिन सच तो यह है कि एक बच्चे के जीवन में अपने पिता का बहुत बड़ा और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण स्थान होता है। ऐसा कहा जाता है कि अगर किसी के घर में मां नहीं है तो बच्चों की देखरेख ठीक से नहीं हो पाती ठीक उसी तरह पिता के न होने पर भी बच्चों का वहीं हाल होता है। अपने बच्चे को वो सारे लाड़-प्यार, वो गाड़ी पर घुमाना, खाने-पीने की चीजें दिलाकर लाना। हमारे प्राचीन ग्रंथो में पिता की महिमा का गुणगान भी किया गया है जो इस श्लोक के माध्यम से प्रस्तुत है l 

पिता धर्मः पिता स्वर्गः पिता हि परमं तपः।

पितरि प्रीतिमापन्ने प्रीयन्ते सर्वदेवताः॥

हमारे भारतीय शास्त्रों में पिता का गायन अमित है अजर-अमर है l दुनिया के जितने भी सूखा है सब हमें पिता के द्वारा ही मिलते है l पद्मपुराण में कहा गया है कि पिता धर्म है, पिता स्वर्ग है और पिता ही सबसे श्रेष्ठ तप है। पिता के प्रसन्न हो जाने पर सम्पूर्ण देवता प्रसन्न हो जाते हैं। जिसकी सेवा और सदगुणों से पिता-माता संतुष्ट रहते हैं, उस पुत्र को प्रतिदिन गंगा-स्नान का पुण्य मिलता है। इस श्लोक में बताया गया है की पिता ही हमारे जीवन का धर्म, कर्म, स्वर्ग और हमारी साधना है l यदि हम अपने सम्पूर्ण जीवन काल में अपने पिता का मन को जीत लिया तो फिर हमे किसी भी तीर्थ और धार्मिक स्थान जाने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि हमारे सभी तीर्थ हमारे पिता के चरणों में ही होते है l हमारे पिता अगर हमसे खुश है तो सम्पूर्ण संसार की खुशी हमारी झोली मे है l 

वर्तमान समय में इसे मनाने के हर देश के अपने-अपने अलग तरीके है पर सबका उद्धेश्य केवल एक ही है पिता के प्रति हमेशा समर्पित भाव रखना l इस जून माह में मनाने की मान्यता इसलिए है क्योंकि जब सबसे पहले इस दिवस का उत्सव मनाया गया तो जून माह का तीसरा रविवार था इस कारण से इस पितृ दिवस को जून माह के तीसरे रविवार के दिन ही पिता के त्यौहार के रूप में मानते है l इस वर्ष जून माह का तीसरा रविवार 16 जून को ही पड़ रहा है इस कारण से इस वर्ष 2019 में पितृ दिवस को 16 को ही मनाया जाएगा l इस पितृ दिवस को विश्व के सभी देश अलग अलग तारीखों पर भी मानते है l माता-पिता ही दुनिया की सबसे गहरी छाया होते हैं, जिनके सहारे जीवन जीने का सौभाग्य हर किसी के बस में नहीं होता। इसलिए हम अपने माता-पिता का आशीर्वाद लेकर सिर्फ एक दिन ही उन्हें याद ना करते हुए प्रतिदिन उन्हें नमन कर अपना जीवन सार्थक बनाएं क्योंकि माता और पिता दोनों की सहायता से ही जीवन की नैय्या चलती है। अकेले से नहीं l इस पितृ दिवस के शुभ अवसर पर हमे हमारे समर्थ के ही अनुसार अपने पिता जी को उनकी प्रिय वस्तुओं की भेट करें और उनके जीवन से जुड़ी सबसे अच्छी घटना को याद कर उनके गौरव को और ऊंचा करें l 

 

हमारे भारत वर्ष में एक बहुत ही प्राचीन कहावत प्रचलित है – 

                        बाढ़ै पूत पिता के धर्मा। 

                        खेती उपजै अपने कर्मा ।।

इस कहावत के द्वारा यहाँ पर दर्शाया गया है की पिता के कर्मो के द्वारा ही पुत्र की उन्नति होती है और खेती की उपज आपके कर्मो के अनुरूप उसकी पैदावार होती है यहाँ पर कहने का अभिप्रायः ये है की हम अपने जीवन मे जो भी बनते है वो सब हमारे पीछे हमारे माता-पिता का हाथ होता है और उनकी दुवाएं सदैव हमारे साथ रहती है l 

Free Prediction Yes I Can Change Date Published : 15 Jun 2019
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