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नव शक्तियों में सप्तमी देवी माँ काली का स्वरूप तथा पूजन का महत्व

अपने महा विनाशक गुणों से शत्रु और दुष्टों का संहार करने वालीं सातवीं दुर्गा का नाम कालरात्रि है। कालरत्रि की पूजा नवरात्र के सातवें दिन की जाती है। विनाशिका होने के कारण इनका नाम कालरात्रि पड़ गया।

आकृति और सांसारिक स्वरूप में यह कालिका का अवतार, यानी काले रंग-रूप की अपनी विशाल केश राशि को फैलाकर चार भुजाओं वाली दुर्गा हैं, जो वर्ण और वेश में अर्द्धनारीश्वर शिव की तांडव मुद्रा में नजर आती हैं। इनकी आंखों से अग्नि की वर्षा होती है। इनकी सवारी गधा है| जो समस्त जीव जंतुओं में सबसे ज्यादा परिश्रमी और निर्भय होकर अपनी अधिष्ठात्री देवी कालरात्रि को लेकर इस संसार में विचरण कर रहा है। यह देवी अपने भक्तों पर असीम कृपा करती हैं और उन्हें हर ओर से रक्षा प्रदान करती हैं। बंगाल क्षेत्र के लोग माँ काली की विशेष पूजन करते है और माँ को खुश करने के लिए माँ के अनेकों मन्त्र और तंत्रों से माँ काली से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। 

मां कालरात्रि दुष्टों का विनाश और ग्रह बाधाओं को दूर करने वाली हैं, जिससे साधक भयमुक्त हो जाता है। वह अपने हाथ में चक्र, गदा, तलवार, ढाल, धनुष-बाण, पाश और तर्जनी मुद्रा धारण किए हुए हैं। वह माथे पर चंद्रमा का मुकुट धारण करती हैं। जो व्यक्ति देवी कालरात्रि की एकाग्रचित्त होकर पूजा करता है, देवी उसकी सभी बाधाएं दूर कर देती हैं।

 

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Free Prediction Yes I Can Change Date Published : 27 Sep 2017
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