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जानिए कैसे करें बृहस्पतिवार व्रत और कथा ?

जीवन में शिक्षा, समृद्दि, मान-सम्मान और य़श की चाह रखने वालों के लिए बृहस्पतिवार का व्रत बहुत ही सरल और अच्छा माना जाता है। इस व्रत के करने से जीवन की सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है और घर परिवार धन-धान्य और वैभव से युक्त रहता है। गुरुवार व्रत या बृहस्पतिवार व्रत बहुत ही फलदायी व्रत माना जाता है। इस व्रत के देवता संसार के पालनहार भगवान विष्णु जी है और इस व्रत में उन्ही की पूजा आराधना की विधान है । बृहस्पतिदेव को बुद्धि का कारक माना जाता है। इस व्रत को धारण करने से व्रती को शुभ, सौभाग्य, संतान और मन चाहे फल की प्राप्ति होती है । गुरुवार व्रत समस्त मनोकामनाओँ को पूर्ण करने वाला है। जन्म कुण्ड़ली के अशुभ गुरु के प्रभाव को कम करने के लिए यह व्रत किया जाता है। 

बृहस्पतिवार व्रत विधि - गुरुवार का व्रत किसी भी हिन्दु माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार और अनुराधा नक्षत्र के योग से प्रारंभ करे तो बहुत ही अच्छा रहेगा और ऐसे योग में अगर विलम्ब हो तो आप शुक्ल पक्ष के किसी भी गुरुवार से यह व्रत प्रारंभ कर सकते है । गुरुवार के दिन प्रात: स्नान आदि करके पीले रंग का वश्त्र धारण करे एवं मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक करे। इस दिन केले के पेड़ के दर्शन अवश्य करे । गुरुवार के दिन एक समय ही भोजन करना चाहिए और व्रत करने वाले को भोजन में चने की दाल अवश्य खानी चाहिए। बृहस्पतिवार के व्रत में केले की पूजा करनी चाहिए। गुरुवार के दिन व्र�ी को बाल नही कटवाने चाहिए, बालों में तेल नहीं लगाना चाहिए, इस दिन कपडे नही धोने चाहिए, नमक और खट्टे पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए । पुरुष यह व्रत लगातार 16 गुरुवार कर सकते हैं परन्तु महिलाओं या लड़कियों को यह व्रत तभी करना चाहिए जब वो पूजा कर सकती हैं, मुश्किल दिनों में यह व्रत नही करना चाहिए।

बृहस्पतिवार व्रत महत्व - गुरुवार व्रत में विष्णु भगवान एवं बृहस्पति देव दोनों की पूजा होती है जिससे घर में सुख समृद्धि बनी रहती है, कुवारी लडकियां इस व्रत को इसलिए करती हैं जिससे की उनके विवाह में आने वाली रुकावटें दूर हो जाएगी। ऐसा कहा जाता है की अगर आप वर्ष भर गुरुवार का व्रत करते हैं तो आपके घर में कभी भी पैसे रुपयों की कमी नही होती और आपका घर हमेशा धन-धान्य से भरा रहता है। 

बृहस्पतिवार व्रत कब से प्रारंभ करें - हिन्हु माह के पूष या पौष के महीने को छोड़कर जो कि दिसम्बर या जनवरी में आता है को छोड़कर आप इस व्रत को किसी भी माह के शुक्लपक्ष के प्रथम गुरुवार से शुरू कर सकते हैं। इस दिन मन में किसी भी प्रकार नराकात्मक सोच नही लानी चाहिए और गलत बोलने से भी बचना चाहिए अन्यथा व्रत से मिलने वाले लाभ में कमी हो सकती है।

बृहस्पतिवार व्रत उद्यापन विधि - उद्यापन करने के पूर्व कुछ चीजों को घर में रख लें जैसे - चने की दाल, गुड़, हल्दी, केले, पपीता और पीला कपड़ा और अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा फिर गुरुवार को यथावत पूजा के बाद प्रार्थना करिए की आपने संकल्प के अनुसार अपने व्रत पूरे कर लिए हैं और भगवान आप पर कृपा बनाये रखें, और आज आप पूजन का उद्यापन करने जा रहे हैं और पूजा में ये सारी सामग्री भगवान विष्णु को चढ़ाकर किसी ब्राह्मण को दान करके उनका आशीर्वाद लीजिये। 

Free Prediction Yes I Can Change Date Published : 16 Sep 2019
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