+91 9821599237
+91 98215 99237
बस अब दु:ख और नहीं
Call Us: +91-124-6674671

जानिए शरद पूर्णिमा की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि ?

हमारे सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा को लेकर बहुत सारी मान्यताएं प्रचलित है। शरद पूर्णिमा के व्रत करने से सारी मनोकामनाओं की पूर्ती होती है। इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. यह पूर्णिमा अन्यी पूर्णिमा की तुलना में काफी लोकप्रिय है। मान्य ता है कि यही वो दिन है जब चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त  होकर धरती पर अमृत की वर्षा करता है। हिन्दु पंचाग के अऩुसार अश्विन मास के शुक्लु पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार शरद पूर्णिमा 13 अक्टू बर दिन रविवार को मनाई जायेगी।

शरद पूर्णिमा हर प्रकार से हमारे लिए बहुत ही लाभकारी होती है, क्योंकि इस दिन चन्द्रमा प्रथ्वी के सबसे करीब होता है, और उससे चाँद की रोशनी में होनी वाली हल्की-हल्की ओस की वर्षा अमृत के समान होती है जो हमारे शरीर और स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा वाली रात को घर की छत पर खीर बनाकर रखने से रात्रि में होने वाली चन्द्रमा की अमृत वर्षा रखी खीर में होती है, जिसे खाने से हमारा शरीर एक वर्ष के लिए पूर्णतः निरोगी हो जाता है। शरद पूर्णिमा पर बनाई जाने वाली खीर मात्र एक व्यंजन नहीं होती है।

ग्रंथों के अनुसार ये एक दिव्य औषधि होती है। इस खीर को गाय के दूध और गंगाजल के साथ ही अन्य पूर्ण सात्विक चीजों के साथ बनाना चाहिए। अगर संभव हो तो ये खीर चांदी के बर्तन में बनाएं। इसे गाय के दूध में चावल डालकर ही बनाएं। ग्रंथों में चावल को हविष्य अन्न यानी देवताओं का भोजन बताया गया है। महालक्ष्मी भी चावल से प्रसन्न होती हैं। इसके साथ ही केसर, गाय का घी और अन्य तरह के सूखे मेवों का उपयोग भी इस खीर में करना चाहिए। संभव हो तो इसे चंद्रमा की रोशनी में ही बनाना चाहिए। 

शरद पूर्णिमा पूजन विधि - हिन्दु पूजा पद्धति के अनुसार सूर्यास्त के बाद देवी लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। पूजा में दक्षिणावर्ती शंख से महालक्ष्मी और विष्णुजी का अभिषेक करें। शंख में केसर मिश्रित दूध डालकर भगवान को स्नान कराना चाहिए। कमल के गट्टे की माला से जाप करना चाहिए। पूर्णिमा की शाम को शिवलिंग के पास दीपक जलाएं और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।

शरद पूर्णिमा का महत्व - शरद पूर्णिमा का चांद और साफ आसमान मॉनसून के पूरी तरह चले जाने का प्रतीक है। कहते हैं ये दिन इतना शुभ और सकारात्मक होता है कि छोटे से उपाय से बड़ी-बड़ी विपत्तियां  टल जाती हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इसी दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था।इसलिए धन प्राप्ति के लिए भी ये तिथि सबसे उत्तम मानी जाती है। कहा जाता है कि जो विवाहित स्त्रियां इस दिन व्रत रखती हैं उन्हेंष संतान की प्राप्तिा होती है. जो माताएं इस व्रत को करती हैं उनके बच्चेि दीर्घायु होते हैं। अगर कुंवारी लड़कियां ये व्रत रखें तो उन्हें मनचाहा पति मिलता है।

शरद पूर्णिमा शुभ मुहूर्त -

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ:       13 अक्टूैबर 2019 की रात 12 बजकर 36 मिनट से

पूर्णिमा तिथि समाप्त:      14 अक्टूूबर की रात 02 बजकर 38 मिनट तक

चंद्रोदय का समय:         13 अक्टूकबर 2019 की शाम 05 बजकर 26 मिनट

 

Free Prediction Yes I Can Change Date Published : 12 Oct 2019
Free Future Prediction
View all blogs
Kundli Free Prediction
Match Making Kundli

like & follow

Contact Info
Follow Us
              


We accept all these major cards

Free Future Prediction
Copyright © 2005 - 2019. GD Vashist & Associates Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
हिंदी में पढ़े Yes I Can Change