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कैसे शांत होगी, राहु ग्रह की कष्टकारी पीड़ा ?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु ग्रह को छाया ग्रह की उपमा दी गई है। ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह इसलिए कहा जाता है कि यह नक्षत्र मण्डल में किसी भी प्रकार का कोई भी भार और स्थान ग्रहन नही करते है और न ही इसकी कोई आकृति किसी पिण्ड के रुप में विराजमान है जैसे कि सूर्य और चन्द्रमा की है। राहु ग्रह को इस तरह से जाने सकते है, जब चन्द्रमा प्रथ्वी के चक्कर लगाता है, तब राहु ग्रह के द्वारा एक प्रकार की छाया का निर्माण होता है इसी कारण इसको छाया ग्रह कहा जाता है। ज्योतिष के अनुसार राहु छाया ग्रह होने के बाद भी जन्म कुण्डली में अपना प्रभाव बनाए रखता है। हमारी जन्म कुण्डली में राहु के कमजोर होने पर अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है तथा जीवन में बहुत प्रकार की बिमारियों के होने के भी संकेत मिलते है। जन्म कुण्डली में राहु की खराबी जातक को जेल भेजने तक के योग भी निर्मित कर देती है। 

ज्योतिष के अनुसार जन्म कुण्डली में राहु और केतु की एक ऐसी भी स्थिति बनती है, जिससे एक कुयोग का निर्माण होता है, जिसका नाम है कालसर्प दोष। जब जन्म कुण्डली के सभी ग्रह राहु और केतु के अंदर आ जाये अर्थात दोनो ग्रह किनारे में हो और बाकी के ग्रह बीचो बीच हो तो ऐसी स्थिति में यह दोनो ग्रह काल सर्प दोष का निर्माण करते है। राहु के द्वारा जातक को हमेशा बुरे प्रभाव नही मिलते है, परंतु यही जातक की जन्म कुण्डली में राहु क�जोर स्थिति के अंदर है, तो फिर बुरे फल प्राप्त होने लगते है। राहु ग्रह के बुरे प्रभावो के अंतर्गत स्वास्थ्य संबंधित परेशानिया मिलना, सही निर्णन न ले पाना, याददाश्त में कमजोरी आना, बुद्धि का सही दिशा में न लग पाना, मन का इधर-उधर भटकना इन सभी प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

जब जन्म कुण्डली में राहु की दशा या महादशा का काल प्रारंभ होता है, तथा जन्म कुण्डली में राहु की स्थिति नाजुक है तो भी हमे कठिन समय से होकर गुजरना पड़ता है, क्योंकि किसी भी ग्रह की दशा या महादशा का उचित फल तभी प्राप्त होता जब वह ग्रह हमारी जन्म कुण्डली के अनुकुल हो और दशा या महादशा के पूर्व भी उस ग्रह से हमें अच्छे फल प्राप्त हो रहे है, तब हमें किसी भी ग्रह की महादशा का पूर्ण रुप से  फल प्राप्त होता है। जन्म कुण्डली में राहु के खराब होने से हम मानसिक रुप से बहुत ही कमजोर हो जाते है, जिससे हम अपने भविष्य की योजना बनाने में असमर्थ हो जाते है। राहु के खराब होने से आर्थिक संकट का सामना भी करना पड़ सकता है। खुद की कार्य क्षमता में संदेह होने लगता है,कि क्या यह मै कर पाउंगा या नही। घर-परिवार, समाज तथा रिश्तेदारों के प्रति गलतफहमी की भावना उत्पन्न होने लगती है। अपनी जुबान पर से नियंत्रण उठ जाता है तथा किसी को भी बिना सोचे समझे कुछ भी बोल देते है, जिसका बुरा असर हमारे ऊपर पड़ता है। 

 

राहु के उपाय – 

•          प्रतिदिन अपने माथे पर सफेद चंदन का टीका जरुर लगाए।

•          सात प्रकार के अनाज, खुशबू वाला तेल, नीला कपड़ा शनिवार के दिन किसी शनि मंदिर या फिर किसी गरीब को दान करें। 

•          किसी जरुरतमंद व्यक्ति को धारीदार कंबल और साबुत उड़त भी दान कर सकते है।

 

Free Prediction Yes I Can Change Date Published : 28 Nov 2019
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