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गीता जयंती पर जानें, इसमें छिपे गूढ़ रहस्य ?

गीता के अंदर मानव जीवन को जीने के गूढ़ रहस्यों का भण्डार है, जिसे अपनाकर अपने जीवन को संसारिक मोह के बंधनों से अलग कर परमात्मा की प्राप्ति का मार्ग चुना जा सकता है। गीता सिर्फ एक किताब नही है, यह ज्ञान का वह खजाना है, जिसको मिल गया समझ उसके जीवन का उद्धार हो गया। गीता को हिन्दू धर्म के सबसे बड़े ग्रंथों की जगह प्राप्त है। हिन्दू समाज में सबसे ज्यादा पवित्र पुस्तक गीता को ही गया है।

हिन्दू धर्म के सभी वेदों, ग्रंथो, पुराणो और काव्यों का निचोड़ अर्थात सार गीता को ही कहा जाता है। गीता के जन्म को लेकर पुराणों की मान्यता है, कि गीता का जन्म भगवान श्री कृष्ण के श्री मुख के द्वारा हुआ है। गीता उन लोगों को सच्चे सद् मार्ग का काम करती है, जो लोग धर्म का रास्ता भूल कर गलत रास्ते पर चाले जाते है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में उस वक्त गीता का ज्ञान दिया था जब वह अपने कर्म पथ से भटकने लगे थे।

हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार गीता जयंती हर वर्ष मार्गशीर्ष माह की शुक्ल एकादशी की एकादशी के दिन मनाई जाती है। वर्ष 2019 में अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार 8 दिसम्बर को गीता जयंती भारत के साथ-साथ संपूर्ण विश्व में मनाई जायेगी। गीता जयंती के दिन गीता का दर्शन करना बहुत ही पुनीत तथा लाभकारी माना गया है। गीता जयंती के दिन गीता पाठ का और भी अधिक महत्व बताया गया है तथा कहा गया है, कि गीता जयंती के दिन जो भी इंसान गीता के श्लोको को पाठ करता है, उसके पूर्व जन्म के सभी पापों का अंत हो जाता है। जो व्यक्ति गीता के द्वारा बताये गये रास्ते पर चलता है, वह मनुष्य जीवन में कभी भी अपने कर्म पथ से नही भटकता है। गीता के अंदर साहित्य और संस्कारों का भण्डार है, जिसके अध्ययन एवं मनन से इंसान संस्कारी तथा परोपकारी बनता है तथा उसके जीवन में कभी भी अभिमान, अहंकार, लालच, काम, क्रोध, द्वेष का प्रवेश नही हो पाता है। 

 

गीता में एक श्लोक है, जिसका उल्लेख हर जगह पर होता है –

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।

मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि ॥

 

इस श्लोक के माध्यम से गीता कहती है, कि इंसान को कर्म करने में ही अपना अधिकार समझना चाहिए बल्कि फल की इच्छा नही करनी चाहिए। फल प्राप्ति के लिए कर्म मत करों और न ही ऐसा मन में कभी भी विचार लाओं कि फल प्राप्ति के बिना कर्म क्यों करु। 

हमारी प्रकृति और ईश्वर का नियम है, कि अगर तूने कर्म किया है और फिर कैसा भी किया है, उसका फल तुझे जरुर मिलेगा परंत मै इस बात का कोई दावा नही करता हू कि फल किस प्रकार का होगा। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है, कि फल हमेशा कर्म के अनुरुप ही मिलता है तो जाहिर सी बात है, कि हमारे कर्म अच्छे होगे तो हमें फल भी अच्छे ही प्राप्त होगे और अगर हमने बुरे कर्म किये होगे तो फिर अच्छे फलों की आशा क्यों करें।

 

Free Prediction Yes I Can Change Date Published : 07 Dec 2019
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