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गणेश चतुर्थी पर जानें सम्पूर्ण गणेशोत्सव, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

हिन्दु पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी का त्यौहार प्रतिवर्ष भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है जो इस वर्ष अंग्रेजी कैलेण्डर के हिसाब से 2 सितम्बर 2019, दिन सोमवार को बड़े ही धूम-धाम से यह उत्सव मनाया जायेगा ।

गणेश चतुर्थी का त्यौहार संपूर्ण भारत में मनाया जाता है परंतु कुछ क्षेत्रों में इसे विशेष रुप से मनाया जाता है क्योकि उन क्षेत्रों के लोग इस त्यौहार को हिन्दु धर्म के सबसे बड़े त्यौहार के रुम में मनाते है। जैसे पश्चिम बंगाल के लोगों का मुख्य त्यौहार दुर्गा पूजा या नवरात्रि का पर्व होता है उसी प्रकार गणेश चतुर्थी का महाराष्ट्र और महाराष्ट्र के आसपास का सारा क्षेत्र गणेश चतुर्थी को मुख्य त्यौहार के रुप में बडी ही धूम और उल्लास के साथ मनाता है। गणेश चतुर्थी का यह उत्सव लगभग दस दिनों तक चलता है जिस कारण इसे गणेशोत्सव भी कहा जाता है।

उत्तर भारत में गणेश चतुर्थी को भगवान श्री गणेश की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी के नाम से ही स्पष्ट है कि भगवान गणेश की पूजा अर्थात इस गणेश उत्सव में हम गणपति की प्रतिमा को स्थापित करते है और दस दिनों तक पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ उनकी पूजा भक्ति करते है । यह उत्सव हिन्दु माह की भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से लेकर चतुर्दशी तक मनाते है।

कुछ जगहों में इस दिन से विद्याध्ययन का शुभारंभ होता था। इस दिन बच्चे डण्डे बजाकर खेलते भी हैं। इसी कारण कुछ क्षेत्रों में इसे डण्डा चौथ के नाम से जाना जाता है। पुराणों के अनुसार यह मत है कि इस दिन सर्व प्रथम पूज्य गणेश भगवान का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन का गणेश जयंती के भी रुप में मनाते है। 

 

गणेश चतुर्थी पूजा और व्रत विधि - गणेश चतुर्थी के व्रत को करने के लिए प्रात:काल स्नानादि से निवृत होकर भगवान गणपति की प्रतिमा अपने सामर्थ के अनुसार स्थापित करें इसके बाद कलश की स्थापना करें। यह सब करने के बाद गणेश जी का मंत्रों के द्वारा पूजन प्रारंभ करें और अंत में लड्डूओं का भोग लगायें और गणेश चतुर्थी व्रत की कथा का श्रवण जरुर करें । गणेश जी प्रतिमा के पास पांच लड्डू रखकर बाकि ब्राह्मणों और कन्याओं में बांट दें।

गणेश जी की पूजा सांय के समय करनी चाहिये। पूजा के समाप्त होने के बाद अपनी नजर नीची रखते हुए चंद्रमा को अर्घ्य दें। शास्त्रों की मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिये और अगर ऐसा करते है तो अपने इसका दोष लग सकता है, चन्द्र दोष लगने पर इसका निवारण अवश्य करायें। जो व्यक्ति इस रात्रि को चन्द्रमा को देखते हैं उन्हें झूठा-कलंक प्राप्त होता है क्योकि ऐसा शास्त्रों का निर्देश है। इसके पश्चात ब्राह्मणों और कन्याओं को भोजन करवाकर उन्हें अपनी यथा शाक्ति के अनुसार कुछ दक्षिणा दें।

 

गणेश चतुर्थी पर पूजा करने का शुभ मुहूर्त -

गणेश पूजा करने का समय        – 11:05 से 13:36

चंद्र दर्शन से बचने का समय       - 08:55 से 21:05 (2 सितंबर 2019)

चतुर्थी तिथि आरंभ               - 04:56 (2 सितंबर 2019)

चतुर्थी तिथि समाप्त              - 01:53 (3 सितंबर 2019)

 

गणेश चतुर्थी का महत्व - गणेश चतुर्थी के व्रत और पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। जीवन में अचानक से बढ रहे कर्जों से मुक्ति मिलती है। गणेश चतुर्थी के व्रत करने से व्रती के जीवन में बुद्धि, धैर्य, साहस आदि गुणों की वृद्धि होती है। जीवन में आने वाली विध्न-बाधाओं का स्वतः ही नाश हो जाता है। इस व्रत के करने से आप जब भी किसी भी नयें काम की शुरुआत करते है तो उसमें आपकों सफलता जरुर मिलती है।  

 

Free Prediction Yes I Can Change Date Published : 28 Aug 2019
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