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शुक्रवार व्रत से कैसे प्रसन्न होती है, माँ लक्ष्मी?

सुख-समृद्धि, धन, वैभव और एश्वर्य की प्राप्ति और माता लक्ष्मी के कृपा पात्र बने रहने के लिए शुक्रवार का व्रत बहुत ही लाभकारी माना गया है। शुक्रवार व्रत लक्ष्मी माता, संतोषी माता तथा वैभव लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए रखा जाता है । इस एक व्रत के ही करने से तीनों माताओं की कृपा हमेशा बनी रहती है। यह एक बहुत ही लोकप्रिय व्रत है और आम तौर पर महिलाओं द्वारा किया जाता है. ये देवी संतोषी माता का वरत है. संतोषी मां पार्वती या दुर्गा का एक अन्य रूप है. हमारे धार्मिक ग्रथों में शुक्रवार का दिन संतोषी माता की पूजा के लिए निर्धारित है। अत्यंत ही सरल, आसानी से प्रसन्न होने वाली संतोषी माता का व्रत हर तरह से गृहस्थी को धन-धान्य, पुत्र, अन्न-वस्त्र से परिपूर्ण रखता है और मां अपने भक्त को हर कष्ट से बचाती हैं। शुक्रवार का व्रत करने से व्यक्ति को कला के क्षेत्र में विशेष सम्मान प्राप्त होता है तथा व्यक्ति का वैवाहिक जीवन सुखमय हो जाता है। इस दिन खटाई या खट्टी चीजें बिलकुल नहीं खानी चाहिए। 

 

शुक्रवार व्रत विधि - सामान्यतः सभी व्रतो की ही तरह शुक्रवार व्रत करने वाले व्यक्ति को सूर्योदय से पहले उठना चाहिए और घर को साफ करना चाहिए. स्नान आदि की रोजाना अपनी दिनचर्या को खत्म करने के बाद घर में गंगा जल छिड़क घर को शुद्ध बनाना चाहिए. शुक्रवार का व्रत शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से आरंभ करना शुभ माना जाता है। शुक्रवार के दिन श्वेत वस्त्र धारण करना चाहिए। इस दिन व्यक्ति को पूरे विधि-विधान से शुक्र देव और लक्ष्मी जी की पूजा करनी चाहिए। पूजा समाप्त होने के बाद उन्हें खीर का भोग लगाना चाहिए। भोग लगाने के बाद पहले खीर सफेद गाय को खिलाना चाहिए उसके बाद स्वयं भी खाने में खीर ही खाना चाहिए। 16 शुक्रवार का नियमित उपवास रखें। अंतिम शुक्रवार को व्रत का विसर्जन करें। विसर्जन के दिन उपरोक्त विधि से संतोषी माता की पूजा कर 8 बालकों को खीर-पूरी का भोजन कराएं तथा दक्षिणा व केले का प्रसाद देकर उन्हें विदा करें। अंत में स्वयं भोजन ग्रहण करें।

शुक्रवार व्रत को व्रत करने वाले व्रती को माँ लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है, माँ अपने भक्तों को कभी निराश नही करती है, उनकी झोली हमेशा भरती रहती है। हिन्दु धर्म के प्रत्येक व्रत के अपने अलग-अलग नियम होते है उसी प्रकार शुक्रवार व्रत के भी नियम है परंतु इस व्रत का एक खास नियम यह है, कि इस दिन किसी भी हालात में व्रती और उसके परिवार वालों को खटाई या खट्टे पदार्थों का सेवन पूर्णतः वर्जित होता है और अगर कोई व्रती या व्रती के परिवाल वाले ऐसा करते है तो अच्छे फल मिलने की जगह आपको पूरे व्रत के बुरे परिणाम मिल सकते है । 

हिन्दु धर्म में शुक्रवार को धन की देवी माँ लक्ष्मी का दिन माना जाता है, जो जातक इस व्रत को बडी ही श्रद्धा पूर्वक करते है उनके घर सदा ही धन-धान्य से भरे रहते है । शुक्रवार के व्रत की मान्यता है कि जिस जातक के मन में धन कमाने की अधिक लालसा होती है ऐसे जातको को शुक्रवार का व्रत अवश्य करना चाहिए । जो जातक सुखी और वैभवपूर्ण जीवन जीना चाहते है वो लोग भी शुक्रवार का व्रत रख सकते है। 

 

Free Prediction Yes I Can Change Date Published : 20 Sep 2019
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