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बुराई पर अच्छाई की जीत का उदाहरण है, दशहरा

बुराई पर अच्छाई की जीत का जीता जागता उदाहरण है, दशहरा

हमारे देश में दशहरा को कई नाम से जानते है, जैस – विजयदशमी, आयुध पूजा, शस्त्र पूजा का पर्व और भी कई नाम है। परंतु इन सभी नामों का एक ही संदेश और उद्देश्य है बुराई पर अच्छाई की जीत। हिन्दु धर्म के अनुसार नवरात्रि के समाप्त हो जाने के बाद दसवें दिन इस त्यौहार को बड़ी ही धूम के साथ मनाया जाता है। आश्विन माह में दशमी को मनाया जाने वाला दशहरे का यह पर्व बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन खास कर खरीददारी करना शुभ मानते है, जिसमें सोना, चांदी और वाहन की खरीदी बहुत ही महत्वपूर्ण है। ‍

दशहरे के दिन पूरे दिन भर ही मुहूर्त होते है इसलिए सारे बड़े काम आसानी से संपन्न किए जा सकते हैं। यह एक ऐसा मुहूर्त वाला दिन है जिस दिन बिना मुहूर्त देखे आप कोई भी नए काम की शुरुआत कर सकते हैं। इस वर्ष यह पर्व 8 अक्टूबर को मनाया जायेगा। आश्विन शुक्ल दशमी को मनाए जाने वाला यह त्योहार विजयादशमी या दशहरा के नाम से प्रचलित है।

यह त्यौहार वर्षा ऋतु की समाप्ति का सूचक है। इन दिनों चतुर मासा में स्थगित कार्य फिर से शुरू किए जा सकते हैं। दशहरे के दिन भगवान श्रीराम की पूजा का दिन है। इस दिन घर के दरवाजों को फूलों की मालाओं से सजा दिया है। घर में रखें शस्त्र, वाहन आदि भी पूजा की जाती है। दशहरे का यह त्यौहार बहुत ही पावनता के साथ संपन्न किया जाता है। इस त्यौहार में लोग अपने गिले-शिकवे भूलकर एक दूसरे के गले मिलते है और अच्छे भविष्य के लिए बधाई भी देते है।

इस पर्व को मनाने के पीछे हमारी कई धारणायें। यह पर्व मुख्य रुप से भगवान राम की राक्षस राज रावण पर विजय पाने की खुशी में मनाया जाता है। इस त्यौहार से हमें यही संदेश मिलता है, कि बुराई के पांव कितने भी बड़े क्यों न हो पर एक न एक दिन अच्छाई के हाथों उसकी हार निश्चित है।

आज भी अगर हम दशहरे के त्यौहार से अगर कुछ सीख अपने जीवन में उतार लें, तो हमारा जीवन धन्य हो जायगा। आज जगह-जगह पर रावण का पुतला दहन किया जाता है और ऐसा करते देख हम यह मान लेते है अच्छाई पर बुराई की जीत हो गई पर अगर असल जीत चाहते है तो अपने मन की बुराई जैसे- ईर्ष्या, घृणा, दोष, लालच, मोह इन सभी को नष्ट कर दें, तब जाकर यह त्यौहार सार्थक होगा। 

विजयदशमी मनाने के पीछे राम लीला का उत्सव पौराणिक कथाओं को इंगित करता है। ये सीता माता के अपहरण के पूरे इतिहास को बताता है, असुर राजा रावण, उसके पुत्र मेघनाथ और भाई कुम्भकर्ण की हार और अंत तथा राजा राम की जीत को दर्शाता है। वास्तविक लोग राम, लक्ष्मण और सीता तथा हनुमान का किरदार निभाते है वहीं रावण, मेघनाथ और कुम्भकर्ण का पुतला बनाया जाता है। अंत में बुराई पर अच्छाई की जीत को दिखाने के लिये रावण, मेघनाथ और कुम्भकर्ण के पुतले जला दिये जाते है और पटाखों के बीच इस उत्सव को और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

Free Prediction Yes I Can Change Date Published : 05 Oct 2019
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