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Vijay Mallya
NAME:

Vijay Mallya

DATE OF BIRTH:18 December 1955
TIME OF BIRTH:11:30 AM
PLACE OF BIRTH:Bantwal, Karnataka
Vijay Mallya kundali


विजय माल्या का जन्म सन् 18 दिसंबर 1955 में हिन्दू समाज में एक समृद परिवार श्री विट्ठल माल्या के घर में हुआ था। उनके पिता विट्ठल माल्या यूबी समूह के अध्यक्ष थे।

 

विजय माल्या का जन्म चंद्र की महादशा में हुआ था जो सन् 1962 तक उनके जीवन को प्रभावित करती रही उस दौरान विजय माल्या एक चंचल स्वभाव व मौज मस्ती के व्यक्ति रहे परन्तु इस दशा ने  उनकी माँ की सेहत व पिता की मानसिक परेशानी और धन संपत्ति में समस्यां उत्पन करने का काम किया। 

 

सन् 1969 -1987 में राहु की दशा ने उनको जीवन में एक नया मोड़ दिया जहा राहु और शनि की युति दसवे घर की थी जिसने उनकी पढाई पूरी करवाई वही इस युति ने उनके पिता के सुख से व्यतीत करने का काम करवाया क्योकि विजय माल्या की जन्म कुंडली में उनके पिता के ऊपर अकाल मृतु व अप्रिय घटना घटित होने के योग 28 वे वर्ष के आस पास थे जोकि राहु में सूर्य का अंतर पिता के सुखों को खत्म करने का काम करता है।  यह अरसा  उनके जीवन में सन् 1983 से 1984 के बीच था तथा इसी हादसे के बाद उन्होंने अपने पिता का स्थान ग्रहण किया और यूबी समूह सँभालने का फैसला किया।  विजय माल्या का शनि अच्छा होने के कारण उन्होंने जब शनि के कामो जैसे- शराब, लोहे का काम यानि एयरोप्लेन का काम आरम्भ किया तभी वह अपने जीवन में आगे बढ़ते रहे और कुछ ही वर्षों में अपने पिता से 10 गुना आगे अपनी कंपनी को बढ़ाया परंतु इतना ही नहीं था ग्यारवे घर में बैठे सूर्य, बुध, शुक्र के योग सन् 1986 में उन्हें प्रेम सम्बन्ध में बांधा और उनका विवाह भी सम्पन हुआ। 

 

सातवे घर में बैठे गुरु की दशा में उनके अपने पुत्र का सुख प्राप्त करवाया परंतु सूर्य, बुध, शुक्र का योग और गुरु सातवे घर में बैठे योग ने जीवन साथी का सुख खराब करने का काम किया तथा इसी दशा ने उनका तलाक भी करवाया क्योकि सूर्य ग्यारवे घर में बैठ कर इन्सान को नॉन वेज, अण्डा, शराब का सेवन करने की अनुमति नहीं देता तथा इनके ग्रहण करने से वह जीवन साथी के सुखो व बच्चो के सुखो को खत्म करने का काम करता है और फिर सन् 1993 में गुरु की दिशा में ही उनका दूसरा विवाह हुआ। 

 

अब विजय माल्या की जिंदगी में एक नया दौर आने वाला था जिसका उनको कतई अभास न था और यह दशा थी शनि की जोकि सन् 2003 से 2022 तक उनको प्रभावित करेगी। इस दशा ने उनको राजनीती से तो जोड़ा ही परंतु शनि दसवे घर में बैठ इंसान को 52 साल से पहले घर बनाने की अनुमति नही देता है और साथ ही सूर्य ग्यारवे घर का तथा मंगल की खराबी के कारण उन्हें कर्ज की स्थिति का सामना करना पड़ा और सन् 2009 से 2013 तक शनि में शुक्र के अंतर में उन्होंने अपने शौक को इतना बड़ा लिया की उन्हें सन् 2012 में सरकारी समस्याओं ने घेरना शुरू कर दिया तथा सन् 2013 से 2014 में सूर्य के अंतर में उन्हें मान-सम्मान, सेहत खराबी, जेल जाने, पागलखाने और वीरान स्थानों में रहने का योग तैयार किया तथा सन् 2014 - 2015 तक उन्हें अनेक मानसिक चिंताओं ने घेरा तथा रुपैये पैसे की भी समस्यां उत्पन कराई।  अंत में परेशान होकर उन्होंने अपने देश को छोड़ने का फैसला किया और ब्रिटेन चले गए। 

 

यह सरकारी समस्यां यहाँ समाप्त नही हुई होगी यह समस्या उनके जीवन में सन् 2022 तक रहेगी क्योकि शनि एक मात्र गृह है जो अपने कर्मो का फल निर्धारित करता है।

 




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