बस अब दु:ख और नहीं
Call Us: +91-124-6674671

नव शक्तियों में आठवीं देवी माँ महागौरी का स्वरूप तथा पूजन का महत्व

नव शक्तियों में आठवीं देवी माँ महागौरी का स्वरूप तथा पूजन का महत्व –

मां दुर्गा का आठवां रूप महागौरी है मां का स्वरूप कुंद के फूल के समान उज्जवल और वृषभवाहिनी (बैल) शांति स्वरूपा है। व्यक्ति के भीतर पल रहे कुत्सित व मलिन विचारों को समाप्त कर प्रज्ञा व ज्ञान की ज्योति जलाता है। मां का ध्यान करने से व्यक्ति को आत्मिक ज्ञान की अनुभूति होती है उसके भीतर श्रद्धा विश्वास व निष्ठ की भावना बढ़ाता है। मां दुर्गा की अष्टम शक्ति है महागौरी जिसकी आराधना से उसके पुत्रों (भक्तों) को जीवन की सही राह का ज्ञान होता है जिस पर चलकर वह अपने जीवन का सार्थक बना सकता है। नवरात्र में मां के इस रूप की आराधना व्यक्ति के समस्त पापों का नाश करती है।

आज के दिन मां की स्तुति से समस्त पापों का नाश होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मां ने कठिन तप कर गौरवर्ण प्राप्त किया था। मां की उत्पत्ति के समय इनकी आयु आठ वर्ष की थी जिस कारण इनका पूजन अष्टमी को किया जाता है। मां अपने भक्तों के लिए अन्नपूर्णा स्वरूप है। आज ही के दिन कन्याओं के पूजन का विधान है। मां धन वैभव, सुख शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं।

कहा जाता है कि मां ने शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया। भगवान महादेव उन पर प्रसन्न हुए और उन्हें पत्नी होने का आर्शीवाद प्रदान किया। भगवान शंकर ने इनके शरीर को गंगाजल से धोया जिसके बाद मां गौरी का शरीर विद्युत के समान गौर व दैदीप्यमान हो गया। इसी कारण इनका नाम महागौरी पड़ा। मां संगीत व गायन से प्रसन्न होती है तथा इनके पूजन में संगीत अवश्य होता है। कहा जाता है कि आज के दिन मां की आराधना सच्चे मन से की  जाये तो माँ गौरी अपने भक्त पर खुश हो कर मनवांछित फल को प्रदान करती है।

किसी समस्या या जानकारी के लिए आप निचे दिए गए लिंक पे क्लिक कर जानकारी ले सकते हैं :-https://goo.gl/1YW4G8

Date Published : 27 Sep 2017
View all blogs

like & follow

Contact Info
Follow Us
           
     

We accept all these major cards

Yes I Can Change
Copyright © 2005 - 2017. G D Vashist & Associates Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
हिंदी में पढ़े Yes I Can Change Tell My Luck