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आओ जाने दशहरा क्यों मनाया जाता है

आओ जाने दशहरा क्यों मनाया जाता है –

वैदिक काल से ही भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक और शौर्य की उपासक रही है| हमारी संस्कृति कि गाथा इतनी निराली है कि देश के अलावा विदेशों में भी इसकी गूँज सुनाई देती है| तभी तो पुरी दुनिया ने भारत को विश्व गुरु माना है|

भारत के प्रमुख पर्वो में से एक पर्व है दशहरा जिसे विजयादशमी के नाम से भी मनाया जाता है| दशहरा केवल त्योहार ही नही बल्कि इसे कई बातों का प्रतीक भी माना जाता है| इस त्योहार के साथ कई धार्मिक मान्यताएँ व कहानियाँ भी जुड़ी हुई है| 

इस पर्व को आश्विन माह की दशमी को देश के कोने-कोने में  उत्साह और धार्मिक निष्ठा के साथ बड़े  उल्लास से मनाया जाता है| क्योंकि यह त्योहार ही हर्ष, उल्लास और विजय का प्रतीक है| दशहरें में रावण के दस सिर इन दस पापों के सूचक माने जाते है| काम, क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, आलस्य, झूठ, अहंकार, मद और चोरी है| इन सभी पापों से हम किसी ना किसी रूप में मुक्ति चाहते है| और इस आस में हर साल रावण का पुतला बड़े से बड़ा बना कर जलाते है कि हमारी सारी बुराइयाँ भी इस पुतले के साथ अग्नि में स्वाह हो जाये| 

इस दिन भगवान राम ने राक्षस रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से छुड़ाया था। राम-रावण युद्ध नवरात्रों में हुआ था। रावण की मृत्यु अष्टमी-नवमी के संधिकाल में हुई थी और उसका दाह संस्कार दशमी तिथि को हुआ। जिसका उत्सव दशमी दिन मनाया|  इसीलिये इस त्यौहार को विजयदशमी के नाम भी से जाना जाता है। दशहरे के दिन जगह-जगह रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले जलाए जाते हैं। देवी भागवत के अनुसार इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस को परास्त कर देवताओं को मुक्ति दिलाई थी  इसलिए दशमी के दिन जगह-जगह देवी दुर्गा की मूर्तियों की विशेष पूजा की जाती है। कहते हैं  रावण को मारने से पूर्व राम ने दुर्गा की आराधना की थी। मां दुर्गा ने उनकी पूजा से प्रसन्न होकर उन्हें विजय का वरदान दिया था। भक्तगण दशहरे में मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कुछ लोग व्रत एवं उपवास करते हैं। दुर्गा की मूर्ति की स्थापना कर पूजा करने वाले भक्त मूर्ति-विसर्जन का कार्यक्रम  संगीत और गाजे-बाजे के साथ करते हैं।

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Date Published : 28 Sep 2017
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