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आओ जानते जन्मकुंडली में कैसे बनता है मंगली दोष एवं उसका जीवन में प्रभाव

  ज्योतिष शास्त्र के द्वारा जन्मकुंडली में मंगली दोष का बहुत बड़ा रहस्य है | जिसे सुनते ही हर व्यक्ति के मन में चिंता उत्पन्न हो जाती है |  वर और कन्या की जन्मकुंडली को मिलान करते समय दाम्पत्य जीवन के आगामी जीवन के सुख -दुःख ,सम्पत्ति , विपत्ति, आय-व्यय तथा आने वाली घटनाओं का मनोवैज्ञानिक एवं तात्विक विवेचन बताता है की आगामी जीवन सुखमय तथा आनंदमय रहेगा |

यदि ग्रहों में परस्पर शत्रुता एवं एक की कुंडली में सामान्य तथा दूसरे  की कुंडली में अरिष्टकारक ग्रह हो कर बैठा हो तो संधर्षमय जीवन के साथ- साथ एक दूसरे (वर -कन्या) के लिए कष्टमयी होता है | कुंडली मिलान के समय मंगली योग का विषेश ध्यान देना बहुत जरुरी है की मंगल ग्रह जन्मकुंडली में बैठ कर मंगली योग तो नहीं बना रहा जो की वर-कन्या के जीवन में कष्ट उत्पन्न कर सकता है|  ऐसी स्तिथि में वर-कन्या की जन्मकुंडली में विचार करना आवश्यक है|

यदि वर कन्या की जन्मकुंडली या चंद्रकुंडली में लग्न (प्रथम भाव ) , चतुर्थ भाव , सप्तमभाव , अष्टमभाव, या द्वादश भाव में मंगल ग्रह बैठा हो तो ऐसी स्तिथि में  कुंडली में मंगली दोष बनता है| यदि इन कहे गए स्थानों में मंगल बैठा हो तो एक दूसरे के लिए ये दोष फल दायी न हो कर कष्टकारी बन जाता है जैसे की - यदि वर की जन्मकुंडली में  ऊपर कहे गए स्थानों में मंगल बैठा हो तो कन्या के लिए कष्टकारी तथा कन्या की कुंडली में बैठा हो तो वर लिए के कष्टकारी होता है 

  यदि ऐसी स्थिति किसी भी जातक की कुण्डली में दिखाई देती है तो वह मंगली दोष के उपायों के द्वारा शुभ फल प्राप्त कर सकता है | यदि आपकी कुंडली में मंगली दोष है तो आप मंगली दोष के उपायों को अपनी (Yes I Can Change )  जन्मकुण्डली  के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं|

किसी समस्या या जानकारी के लिए आप निचे दिए गए लिंक पे क्लिक कर जानकारी ले सकते हैं:-   https://goo.gl/1YW4G8

 

Date Published : 09 Oct 2017
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